संसद में गूंजी आम आदमी की आवाज़: राघव चड्ढा और मोबाइल रिचार्ज का ‘तिलिस्म’

नई दिल्ली। संसद का उच्च सदन, यानी राज्यसभा। तारीख थी 11 मार्च 2026। सदन में रोजमर्रा की तरह कई अहम राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा चल रही थी। तभी अपनी सीट से युवा सांसद राघव चड्ढा खड़े हुए। उनके चेहरे पर एक ऐसी समस्या को लेकर गंभीरता थी, जिससे देश का हर दूसरा नागरिक हर दिन जूझता है।

जैसे ही उन्हें बोलने का मौका मिला, उन्होंने एक ऐसा विषय छेड़ा जिसने पूरे देश के 125 करोड़ मोबाइल यूज़र्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया—”प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज का खेल और टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी।”

1. मोबाइल: अब लग्ज़री नहीं, ज़रूरत है

राघव ने अपनी बात की शुरुआत करते हुए सदन को याद दिलाया कि आज के डिजिटल इंडिया में मोबाइल फोन कोई ‘लग्ज़री’ (विलासिता की वस्तु) नहीं रह गया है। यह हर नागरिक की बुनियादी ज़रूरत है। बिना मोबाइल नंबर के न तो बैंक का ओटीपी (OTP) आता है, न राशन मिलता है, न गैस सिलेंडर बुक होता है और न ही नौकरी की कोई अहम कॉल आती है।

2. 28 दिन के रिचार्ज का ‘घोटाला’

इसके बाद उन्होंने देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों (जियो, एयरटेल, वीआई आदि) की सबसे बड़ी चालाकी की पोल खोली। उन्होंने पूरे सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि कंपनियां ‘मंथली’ (मासिक) पैक के नाम पर 28 दिन का रिचार्ज ही क्यों देती हैं?

राघव ने बेहद सरल गणित समझाते हुए कहा:”साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन के हिसाब से अगर आप गणना करें (28 दिन x 13 बार = 364 दिन), तो एक आम नागरिक को साल में 12 महीने के लिए 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है।”उन्होंने इसे कंपनियों द्वारा की जा रही “लूट” करार दिया और कहा कि इस एक महीने के एक्स्ट्रा पैसे से कंपनियां अपनी जेबें भर रही हैं।

3. इनकमिंग कॉल्स (Incoming Calls) बंद करने पर कड़ा प्रहार

कहानी और बहस का सबसे भावुक और तार्किक मोड़ तब आया, जब राघव ने ‘इनकमिंग कॉल्स’ के बंद होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा:

• लॉजिक क्या है?: “अगर किसी व्यक्ति का रिचार्ज खत्म हो जाता है, तो आप आउटगोइंग कॉल (Outgoing Call) बंद कर दीजिए, यह समझ में आता है। लेकिन इनकमिंग कॉल (Incoming Call) क्यों ब्लॉक कर दी जाती है?”

• आपातकाल की स्थिति: उन्होंने सदन को सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर किसी गरीब या दिहाड़ी मजदूर का फोन बंद हो जाए, तो आपातकालीन स्थिति में वह क्या करेगा? कोई डॉक्टर, कोई रिश्तेदार या कोई कंपनी उसे संपर्क कैसे करेगी?

4. संसद में रखी गईं प्रमुख मांगें

अपने जोशीले भाषण के अंत में राघव चड्ढा ने सरकार और टेलीकॉम कंपनियों के सामने आम जनता की ओर से तीन स्पष्ट मांगें रखीं:

1. एक साल की इनकमिंग वैलिडिटी: रिचार्ज खत्म होने के बाद भी कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल की सुविधा चालू रहनी चाहिए।

2. कैलेंडर महीने के प्लान: 28 दिन के बजाय 30 या 31 दिन (पूरे कैलेंडर महीने) के निष्पक्ष (Fair) रिचार्ज प्लान्स लाए जाएं ताकि जनता को 13वां रिचार्ज न कराना पड़े।

3. पारदर्शिता: टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों के साथ पारदर्शी और जवाबदेह रवैया अपनाएं।

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