
13 साल की तड़प का अंत: इच्छामृत्यु के लिए AIIMS गया हरीश राणा, आखिरी विदाई में फूट-फूट कर रोई मां
गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) के लिए दिल्ली के एम्स (AIIMS) में शिफ्ट कर दिया गया है। 13 साल से कोमा (परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट) में पड़े अपने जवान बेटे को मौत के सफर पर आखिरी विदाई देते हुए पूरे परिवार का कलेजा फट गया।
कैसे हुआ था हादसा?
साल 2013 में रक्षाबंधन के दिन, चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा 19 साल का होनहार हरीश अपनी पीजी की चौथी मंजिल से गिर गया था। इस दर्दनाक हादसे में उसके सिर में गंभीर चोट आई और उसका पूरा शरीर (100% क्वाड्रिप्लेजिया) लकवाग्रस्त हो गया। पिछले 4500 से ज्यादा दिनों से वह अपने बिस्तर पर था—बिना कुछ बोले, बिना कुछ महसूस किए, सिर्फ मशीनों और फीडिंग ट्यूब के सहारे सांसें ले रहा था।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
माता-पिता ने 13 सालों तक एक बच्चे की तरह उसकी सेवा की, लेकिन जब डॉक्टरों ने हर उम्मीद छोड़ दी, तो पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 11 मार्च 2026 को जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने एक बेहद भावुक फैसले में भारत में पहली बार कोर्ट के आदेश पर पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दी। बेंच ने यह माना कि मशीनों के सहारे हरीश की जिंदगी बचाई नहीं जा रही है, बल्कि उसके दर्द को लंबा खींचा जा रहा है।
“सबको माफ करते हुए जाओ हरीश…”
एम्स जाने से पहले गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित उनके घर पर एक बेहद मार्मिक पल देखा गया। ब्रह्माकुमारी बहन ने हरीश के माथे पर तिलक लगाया, उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा और कहा, “सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ हरीश, वक्त आ गया है।” मां के आंसुओं ने हर किसी को रुलाया
घर में सन्नाटा पसरा था। जैसे ही डॉक्टरों की टीम ने हरीश के स्ट्रेचर को दरवाजे की तरफ बढ़ाया, 13 साल तक अपने बेटे के इर्द-गिर्द अपनी पूरी दुनिया समेटने वाली मां निर्मला देवी के सब्र का बांध टूट गया। अपने हाथों से बेटे का चेहरा थामकर उन्होंने उसका माथा चूमा और पल्लू से चेहरा ढंककर फूट-फूट कर रो पड़ीं।
पिता अशोक राणा भारी मन और रुंधे गले से डॉक्टरों की टीम के साथ बेटे को लेकर एम्स के पैलिएटिव केयर (Palliative Care) यूनिट के लिए रवाना हो गए। एम्स में अब एक एक्सपर्ट मेडिकल बोर्ड की निगरानी में धीरे-धीरे हरीश का लाइफ सपोर्ट सिस्टम और फीडिंग ट्यूब हटाई जाएगी, ताकि 13 साल के लंबे दर्द के बाद उसे शांति और सम्मान के साथ अंतिम विदाई मिल सके।
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